धनगर में मिला दुर्लभ प्रजाति का ‘रेड  सैंड  बोआ’ साप सर्फ रक्षक समिति व वन विभाग की सतर्कता से जंगल में सुरक्षित छोड़ा गया

  • 10 वर्षों बाद रायगढ़ क्षेत्र में देखा गया यह दुर्लभ सांप
  • किसानों का मित्र माना जाता है यह विषहीन जीव, तस्करी पर है 3 से 7 वर्ष की सख्त सजा
    रायगढ़:
    रायगढ़ के समीपस्थ ग्राम धनागर में एक दुर्लभ प्रजाति का ‘रेड सैंड बोआ’ (Red Sand Boa) सांप मिलने का मामला सामने आया है। सर्प रक्षक समिति रायगढ़ और वन विभाग की त्वरित सतर्कता व सूझबूझ से सांप को सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
    त्वरित कार्रवाई से बची सांप की जान
    सर्प रक्षक समिति के वरिष्ठ रेस्क्यूवर पुष्पेंद्र त्रिपाठी को सूचना मिली कि धनागर गांव में एक व्यक्ति के घर पर रेड सैंड बोआ सांप देखा गया है, जिसे कोई अज्ञात व्यक्ति जंगल में छोड़ने का झांसा देकर अपने साथ ले गया है।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए सर्प रक्षक टीम के अध्यक्ष विनितेश तिवारी ने तत्काल समिति के सचिव सुमित बेहरा को निर्देशित कर सांप को अपनी सुरक्षा व कस्टडी में लेने को कहा। इसके तुरंत बाद रायगढ़ वन विभाग के परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) श्री एस. एल. लकड़ा जी को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई।
    वन विभाग के मार्गदर्शन में पुनर्वास
    डीएफओ (DFO) कार्यालय में रेंजर श्री एस. एल. लकड़ा एवं उप वनमंडलाधिकारी (SDO) श्री आशीष जी को सांप सौंपते हुए विस्तृत जानकारी दी गई। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के कुशल मार्गदर्शन में सांप का स्वास्थ्य परीक्षण कर उसे जंगल के सुरक्षित क्षेत्र में प्राकृतिक पुनर्वास के लिए स्वच्छंद छोड़ दिया गया।
    विशेष तथ्य: जानिए ‘रेड सैंड बोआ’ के बारे में
  • वैज्ञानिक नाम (Scientific Name): एरीक्स जॉनी (Eryx johnii)
  • स्थानीय पहचान: इसे बोलचाल की भाषा में “बिल खोदू सांप” या “दोमुंहा सांप” भी कहा जाता है। इसका पूंछ वाला हिस्सा भी सिर जैसा गोल दिखता है, जिससे भ्रम की स्थिति बनती है।
  • किसानों का सच्चा मित्र: यह सांप पूरी तरह विषहीन (Non-venomous) और शांत स्वभाव का होता है। यह जमीन में बिल बनाकर मिट्टी को भुरभुरी और उपजाऊ बनाता है तथा खेतों में फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले चूहों और कीटों को खाकर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखता है।
  • अंधविश्वास और अवैध तस्करी पर कड़ी सजा:
    अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में इसकी कीमत करोड़ों रुपये होने, कैंसर की दवाइयों व लग्जरी उत्पादों में उपयोग जैसे अंधविश्वास और भ्रामक प्रचार के चलते इसकी अवैध तस्करी की कोशिशें की जाती हैं।
    चेतावनी: भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत इस सांप को पकड़ना, पालना, मारना या इसका व्यापार करना गैर-कानूनी व गंभीर अपराध है। ऐसा करते पाए जाने पर 3 वर्ष से लेकर 7 वर्ष तक के कठोर कारावास व भारी जुर्माने का प्रावधान है।
    10 वर्षों बाद दिखा यह दुर्लभ जीव
    सर्प रक्षक समिति के अध्यक्ष विनितेश तिवारी ने बताया कि रायगढ़ और आसपास के क्षेत्र में पिछले 10 वर्षों में यह सांप पहली बार देखा गया है। समिति ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार के अंधविश्वास अथवा झांसे में न आएं और वन्यजीव दिखने पर तुरंत वन विभाग या सर्प रक्षकों को सूचना दें।
    समिति ने त्वरित सहयोग और सफल मार्गदर्शन के लिए वन विभाग के अधिकारियों का विशेष आभार व्यक्त किया तथा शहर एवं वनांचल के सभी जीव-जंतुओं के संरक्षण के लिए अपनी निस्वार्थ सेवा जारी रखने का संकल्प दोहराया।

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EDITOR-PRAMOD YADAV
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