चक्रधर समारोह : कथक की लय-ताल में जीवंत हुई रायगढ़ घराने की परंपरा, गुरु सोमा दास के कलाकारों ने बांधा समां

भाव, लय और ताल के सुंदर समन्वय से सजी प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब बटोरी सराहना

रायगढ़। 41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की सातवीं सांस्कृतिक संध्या में रायगढ़ घराने की कथक नृत्यांगना एवं गुरु सोमा दास के मार्गदर्शन में श्री नटराज नृत्य कला केंद्र के कलाकारों ने मनमोहक कथक प्रस्तुति दी। भाव, लय और ताल के सुंदर समन्वय से सजी प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। घुंघरुओं की झंकार, सधी हुई पदचाप और भावपूर्ण नृत्य मुद्राओं पर दर्शकों ने तालियों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
गुरु सोमा दास ने भातखंडे संगीत महाविद्यालय, बिलासपुर से कथक में विशारद तथा कमला देवी संगीत महाविद्यालय से एम.ए. कथक की शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने डॉ. विजया सिंह के मार्गदर्शन में गुरु-शिष्य परंपरा के तहत कथक की साधना की। वर्ष 2019 में पुणे, नेपाल और मलेशिया में आयोजित विभिन्न नृत्य प्रतियोगिताओं में उन्हें पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हुए।
पिछले 15 वर्षों से कथक प्रशिक्षण एवं प्रचार-प्रसार से जुड़ी गुरु सोमा दास ने श्री चक्रधर बालिका सदन की बालिकाओं को करीब पांच वर्षों तक प्रशिक्षण दिया। वर्ष 2023 में इन्हीं बालिकाओं के साथ चक्रधर समारोह में प्रस्तुति भी दी थी। वर्तमान में वे श्री नटराज नृत्य कला केंद्र की संचालिका एवं ओ.पी. जिंदल स्कूल, तमनार में नृत्य शिक्षिका हैं। उनके मार्गदर्शन में कलाकारों की प्रस्तुति ने समारोह की सांस्कृतिक गरिमा में एक और सुंदर अध्याय जोड़ा।

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EDITOR-PRAMOD YADAV
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